Get all popular news in one place from different sources

Vedic rakhi, rakshabandhan 2020, vaidik rakhi banane ki vidhi, rakhi 2020, rakshabandhan date, importance of rakshabandhan | चावल, दूर्वा, सिक्के सहित 6 शुभ चीजों से घर पर ही बना सकते हैं वैदिक रक्षासूत्र, अगर राखी न हो तो रेशमी या सूत का लाल धागा भी भाई को बांध सकते हैं

1

  • Hindi News
  • Jeevan mantra
  • Dharm
  • Vedic Rakhi, Rakshabandhan 2020, Vaidik Rakhi Banane Ki Vidhi, Rakhi 2020, Rakshabandhan Date, Importance Of Rakshabandhan

एक घंटा पहले

  • रक्षासूत्र बांधते समय बोलना चाहिए मंत्र, तिलक लगाकर करें भाई के सुखद भविष्य की कामना

सोमवार, 3 अगस्त को रक्षाबंधन है। इस बार कोरोना वायरस की वजह से कई जगहों पर लॉकडाउन है। बाजार बंद है। ऐसी स्थिति में अगर बाजार की राखी नहीं मिल पा रही है तो बहनें घर पर ही वैदिक राखी बनाकर भाई की कलाई पर बांध सकती हैं।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार वैदिक राखी बनाने के लिए रेशम के कपड़े में चावल, दूर्वा, सरसों के दाने, चंदन, केसर और सोने या चांदी का छोटा सा सिक्का रखें। इन चीजों की पोटली बनाएं। भाई के माथे पर तिलक लगाएं और कलाई पर रेशमी या सूती धागे के साथ ये पोटली बांध दें। रक्षासूत्र बांधते समय भगवान से अपने भाई को सभी परेशानियों से बचाने की प्रार्थना करें। रक्षाबंधन पर सुबह 9.29 बजे तक भद्रा रहेगी। इसके बाद पूरे दिन रक्षासूत्र बांधा जा सकता है।

इन चीजों का है भावनात्मक महत्व

दूर्वा – दूर्वा श्रीगणेश को प्रिय है। इसे शुभ और पवित्र माना जाता है। राखी के साथ इसे बांधने का भाव ये है कि भाई को श्रीगणेश की कृपा मिले और उसके सभी विघ्न खत्म हो। दूर्वा तेजी से फैलती है और इसी तरह भाई के जीवन में खुशियां भी फैलती रहे।

चावल – चावल यानी अक्षत का पूजा-पाठ में काफी अधिक महत्व है। राखी के साथ अखंडित चावल बांधने का भाव ये है कि भाई-बहन का प्रेम हमेशा अखंडित रहे।

केसर – केसर का गुण यह है कि इसकी एक पत्ती भी अपनी महक और रंग फैला देती है। इसी तरह राखी के साथ केसर बांधने का भाव ये है कि भाई के गुण भी बढ़ते रहें और उसकी ख्याति फैले।

चंदन – चंदन शीतलता प्रदान करता है। इसका भाव ये है कि भाई का मन हमेशा शांत रहे। उसके स्वभाव में उग्रता न आए और शीतलता बनी रहे।

सरसों के दाने – सरसों का आयुर्वेद में काफी अधिक महत्व है। इसके तेल से त्वचा में निखार आता है। इसके सेवन से कई बीमारियों से रक्षा होती है। राखी में सरसों के दाने रखने का भाव ये है कि भाई सभी तरह की बुराइयों से बचा रहे।

सोने या चांदी का सिक्का– ये धातुएं महालक्ष्मी को विशेष प्रिय हैं। राखी के साथ ये सिक्के रखकर बहन कामना करती है कि भाई के जीवन धन की कोई कमी न हो। उसे सभी सुख मिले।

अगर राखी न हो तो क्या करें

अगर वैदिक रक्षासूत्र बनाने के लिए ये सभी चीजें ना हो तो सिर्फ रेशमी धागा भी राखी के रूप में बांध सकते हैं। रेशमी धागा भी न हो तो पूजा में उपयोग किया जाने वाला लाल धागा बांध सकते हैं। अगर ये भी न हो तो तिलक लगाकर भाई के सुखद भविष्य की कामना कर सकते हैं।

रक्षासूत्र का महत्व

भविष्य पुराण में लिखा है कि –

सर्वरोगोपशमनं सर्वाशुभविनाशनम्।

सकृत्कृते नाब्दमेकं येन रक्षा कृता भवेत्।।

रक्षाबंधन पर्व पर धारण किया रक्षासूत्र सभी तरह के रोगों और बुराइयों से बचाता है। ये रक्षासूत्र साल में एक बार धारण करने से पूरे वर्ष व्यक्ति की रक्षा होती है।

रक्षासूत्र बांधते समय बोलें ये मंत्र

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।

तेन त्वां अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

इस मंत्र का अर्थ यह है कि प्राचीन समय में एक धागे जैसे रक्षासूत्र ने असुरराज बलि को बांध दिया था, उसी तरह का धागा मैं आपको बांधती हूँ। भगवान आपकी रक्षा करें। यह धागा कभी टूटे नहीं और आप हमेशा सुरक्षित रहें। देवी लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर भगवान विष्णु को मुक्त कराया था।

भाई न हो तो अपने इष्टदेव को बांध सकते हैं रक्षासूत्र

जिन महिलाओं का कोई भाई नहीं है, वे हनुमान, श्रीकृष्ण, शिवजी या अपने इष्टदेव को रक्षासूत्र बांध सकती हैं। पुरुष भी भगवान को रक्षासूत्र बांध सकते हैं।

0

Source link

You might also like